रविवार, 5 फ़रवरी 2012

प्रेरक प्रसंग-22 : भूल का अनोखा प्रायश्चित


प्रेरक प्रसंग-22

भूल का अनोखा प्रायश्चित
 प्रस्तुतकर्ता : मनोज कुमार
बापू और महादेवभाई
नागपुर के पास अस्पृश्यता-निवारण संबंधी दौरा हो रहा था। एक दिन की बात है। बापू का हाथ पोछने वाला रूमाल पिछले पड़ाव पर काम-धाम की अफरा-तफ़री, भीड़-भाड़ में कहीं छूट गया। शायद सूखने के लिए फैलाया गया था, वहीं रह गया। बापू को रूमाल की जब ज़रूरत पड़ी, तो उन्होंने महादेवभाई देसाई से मांगा।

महादेवभाई ने कहा, “खोज लाता हूं।”

उन्होंने बहुत खोजा। रूमाल नहीं मिला। बड़ी दुविधा में थे महादेवभाई, बापू से कैसे कहा जाए कि रूमाल नहीं मिला, कहीं खो गया। फिर भी कहना तो था ही। उन्होंने जाकर कहा, “बापू, रूमाल रूमाल शायद पिछले पडाव पर छूट गया है। मिल नहीं रहा। मैं दूसरा ला देता हूं।”

बापू कुछ देर तक चुप रहे। कुछ सोचते रहे। फिर उन्होंने पूछा, “महादेव! वह कितने दिन तक चलता?”

महादेवभाई ने कहा, “चार महीने और चलता।”

बापू ने अपना निर्णय सुनाया, “तो फिर मैं चार महीने बिना रूमाल के ही चलाऊंगा। भूल का यह प्रायश्चित है। बाद में दूसरा रूमाल लेंगे।”

महादेवभाई क्या बोलते?

***

12 टिप्‍पणियां:

  1. बापू के जीवन का प्रेरक प्रसंग ....अपनी आस्था ....अपने कर्तव्य पर हमें सुदृढ़ करता ....
    सार्थक ...सारगर्भित आलेख ...!!
    आभार मनोज जी ...!!

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  2. Ek Baapu hee the jo is tarah ka nirnay lete....sadharan wyakti kee soch ke pare ye baat hai!

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  3. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
    खबरनामा की ओर से आभार

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  4. बापू की जीवन दृष्टि, उनके विचार, एवं सादगी ही उन्हे अन्य लोगों से अलग रखते हैं । एक लंबे अंतराल के बाद भी बापू अपनी सादगी , सुविचार एवं कार्यों के लिए संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हैं। काश ! हम सब उनकी ही तरह अपनी मानसिकता में परिवर्तन कर पाते । प्रेरक प्रसंग अच्छा लगा । धन्यवाद ।

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  5. मन को शक्ति देता हुआ ...बापू के जीवन का बहुत ही प्रेरक प्रसंग ....
    सार्थक ...सारगर्भित आलेख ...

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  6. भूल का प्रायश्चित करना बापू से सीखा जा सकता है । प्रेरक प्रसंग ।

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  7. bapu ke jivan vritanat se bahut kuch sikha ja skta hai .bahut achcha lga .

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  9. बापू के एक और अनछुए पहलू से सम्बंधित प्रसंग सभी को सीख देता है.

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  10. बापू के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे ........मनोज जी आपके ब्लॉग रोचक तथ्यों को उगाने वाला बेहद उपजाऊ ब्लॉग है | बहुत बहुत आभार सर |

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